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एशिया आर्थिक स्वरूप | Asia Economic Form

  • BY:
    Pragya patle
  • Posted on:
    August 16, 2022

कृषि

नदियों द्वारा निर्मित मैदान जैसेः गंगा-सिंधु का मैदान, यांगटिसीक्यांग व ह्वांगहो का मैदान, इरावदी व मिकांग नदी के मैदानों में उपजाऊ कछारी मिट्टी होने से बड़ी मात्रा में कृषि की जाती है। यहाँ एशिया की अधिकांश जनसंख्या निवास करती है। मैदानी भागों के अतिरिक्त कहीं-कहीं पहाड़ों और पठारों की तलहटी में भी खेती होती है। महाद्वीप की मुख्य फसलें हैं चावल, गेहूँ, मक्का, गन्ना, चाय, कपास, रेशम, जूट (पटसन), रबर तम्बाकू, मसाले एवं फल एशिया महाद्वीप के भारत में चाय, चीन में रेशम, बांग्लादेश में जूर और इण्डोनेशिया में रबर ऐसी मुख्य फसलें है, जो इन देशों की आर्थिक स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करती हैं।

खनिज एवं ऊर्जा के साधन

कृषि में विभिन्न फसलों के उत्पादन के साथ-साथ खनिज एवं ऊर्जा के साधन भी किसी भी देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत आधार प्रदान करते हैं, क्योंकि खनिज एवं ऊर्जा के साधन ही उद्योगों के मुख्य आधार होते हैं। चीन, जापान, भारत, रूस में कोयला, ईरान, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोलियम पदार्थ ऐसे खनिज है, जो इन देशों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसी प्रकार टिन का उत्पादन मलेशिया का मुख्य आर्थिक स्तम्भ है। लोहा भारत, चीन तथा रूस में बहुतायत से मिलता है। उपर्युक्त खनिजों के अलावा मैंगनीज, तांबा, अभ्रक, सीसा, सोना आदि खनिज एशिया महाद्वीप में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

उद्योग

किसी महाद्वीप के कृषि, खनिज एवं ऊर्जा के साधनों का प्रत्यक्ष प्रभाव के उद्योगों पर ह है। एशिया महाद्वीप में भी इनका वृहत् प्रभाव देखने को मिलता है। लोहा-इस्पात उद्योग का सबसे अधिक विकास रूस, चीन, और भारत में हुआ है। यहाँ से लौह-इस्पात का सामान निर्यात किया जाता है। खनिज तेल से सम्बन्धित उद्योगों का विकास ईरान, इराक, कुवैत, रूस, चीन, भारत आदि देशों में हुआ है। इसी प्रकार चीन, भारत और जापान में सूती वस्त्र तथा चीन और जापान में रेशमी कपड़ा बनाने के कारखाने अधिक है। दक्षिण पूर्व एशिया के देशों- भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया आदि में शक्कर तथा रबर के कारखाने हैं। ये सभी उद्योग इन देशों की आर्थिक स्थिति को मुद्द बनाते हैं।

यातायात

प्राचीन काल से ही एशिया में यातायात के साधनों का अच्छा विकास हुआ है। चीन का रिशम मार्ग' तथा भारत का 'ग्रांड ट्रंक रोड' प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है। इस महाद्वीप में चीन, जापान, भारत, सिंगापुर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, रूस ऐसे देश है, जहाँ सड़को का विकास बड़े पैमाने पर हुआ है। जिससे इन देशों के उद्योगों और व्यापार में बहुत उन्नति होने से, वहाँ की आर्थिक दशा प्रभावित हुई है। संसार का सबसे लम्बा रेलमार्ग 'ट्रांस साइबेरियन रेलमार्ग जो रूस की राजधानी मास्को से पूर्व में ब्लाडीबोस्टक तक है। यह मार्ग यहाँ के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी तरह भारत, चीन, जापान आदि देशों के विकसित रेल मार्गों ने भी वहाँ की आर्थिक स्थिति के विकास में सहायता की है।

जलमागों में स्वेज नहर का अत्यधिक महत्व है, जो भूमध्यसागर और लाल सागर को जोड़ती है। एशिया महाद्वीप में इसका अत्यधिक व्यापारिक महत्व है, क्योंकि इस मार्ग से दक्षिण-पश्चिम और पूर्वी एशिया के देश तथा विश्व के अन्य औद्योगिक देश आपस में नजदीक आए है। जिससे इनके व्यापार में वृद्धि हुई है। एशिया में भारत की स्थिति जो तीन ओर से जल से घिरा है जल मार्गों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार एशिया महाद्वीप के लगभग सभी महानगर आपस में वायु मार्गों से जुड़े हैं। मुम्बई, कोलकाता, दिल्ली, चैन्नई, रंगून, बैंकाक, हांगकांग, तेहरान, सिंगापुर, शंघाई, टोक्यो आदि महत्वपूर्ण शहर वायु मार्गों से जुड़े हैं। यद्यपि एशिया में खनिज, ऊर्जा के संसाधनों, उद्योगों तथा यातायात साधनों का यहाँ के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान है, फिर भी यहां 80% जनसंख्या ग्रामीण है। यही कारण है कि एशिया के अधिकाश देशों में उद्योगों की तुलना में जीविका का प्रमुख आधार कृषि ही है।

एशिया में भारत की स्थिति और उसका महत्व

एशिया महाद्वीप के दक्षिण में भारत की तीन ओर समुद्रों से घिरी और मध्यवर्ती स्थिति प्राचीन कान से ही व्यापारिक महत्व की रही है। भारत, वर्तमान में हो रहे औद्योगिक उत्पादों के निर्यात के कारण, अपनी स्थिति का भरपूर दोहन कर रहा है। महत्त्वपूर्ण स्थिति के कारण ही भारत से विश्व के मुख्य वायु मार्ग गुजरते हैं। उष्ण जलवायु से समशीतोष्ण जलवायु के विस्तार होने के कारण भारत कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भारत सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व का महत्वपूर्ण देश है।

एशिया के लोग

जनसंख्या की दृष्टि से एशिया में चीन का स्थान पहला है और भारत का स्थान दूसरा है। विश्व की लगभग दो तिहाई जनसंख्या केवल एशिया महाद्वीप में निवास करती है। एशिया का जनजीवन मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है, अभी भी अधिकांश स्थानों पर लोग, पुराने परम्परागत ढंग से कृषि करते हैं, यद्यपि चीन, जापान, रूस एवं भारत में आधुनिक ढंग से खेती की शुरुआत हो चुकी है। एशिया महाद्वीप में उपलब्ध कृषि योग्य भूमि, खनिज एवं ऊर्जा के संसाधन, उद्योग धन्धे एवं यातायात के विकास का समग्र प्रभाव यहां के जनजीवन पर पड़ा है। जनसंख्या, ग्रामों से नगरों की ओर प्रवाहित हुई है और उन पर शहरीकरण का प्रभाव हुआ है। इससे इनका जीवन स्तर अधिक विकसित हुआ है। मानव भूगोलवेत्ताओं के अनुसार एशिया में प्रमुख रूप से कॉकेशियन, मंगोलॉयड प्रजातियाँ और इनकी मिलीजुली प्रजातियाँ निवास करती हैं। महाद्वीप में कुछ भ्रमणशील व घुमन्तू जातियाँ भी है जैसे- उत्तरी एशिया में समोयडीज, याकूत, स्टेपी प्रदेश के खिरगीज और कज्जाक, मध्य एशिया में कालमुक, अरब के बहू इत्यादि।



आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।
(I hope the above information will be useful and important. )
Thank you.

R. F. Tembhre
(Teacher)
pragyaab.com


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