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जलमण्डल | hydrosphere

पृथ्वी के धरातल का लगभग तीन-चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है। पृथ्वी का जल से घिरा हुआ भाग हो, मण्डल कहलाता है। पृथ्वी के लगभग 71 प्रतिशत भाग पर जल और 29 प्रतिशत भाग पर थल है। इस प्रकार चल भाग की तुलना में जल भाग अधिक है।
जलमण्डल में महासागर, सागर, खाड़ियों, झीलें, नदियाँ, तालाब आदि सम्मिलित है। पृथ्वी के धरातल पर जल और थल के वितरण में भिन्नता पाई जाती है। उत्तरी गोलार्द्ध में थल भाग अधिक होने से इसे 'स्थलीय गोलार्द' कहते है। दक्षिणी गोलार्द्ध में जल भाग अधिक होने से इसे 'जलीय गोलार्द्ध' कहते है। जल के छोटे-छोटे भाग सागर, खाड़ी कहलाते है और बड़े भाग महासागर कहलाते हैं।
विश्व के बड़े महासागर है-
1. प्रशान्त महासागर
2. अटलाण्टिक महासागर
3. हिन्द महासागर तथा आर्कटिक महासागर।

(1) प्रशान्त महासागर

यह विश्व का सबसे बड़ा महासागर है। इसकी औसत गहराई लगभग 4200 मीटर है। उत्तर की ओर यह सकरे बेरिंग जलडमरू मध्य द्वारा उत्तरी ध्रुव महासागर से जुड़ा है। दक्षिण में अन्टार्कटिका तक फैला है। इसमें नई गहरे गर्त है। संसार का सबसे बड़ा गर्त मैरियाना' (11022 मीटर) इसी महासागर में है।

(2) अटलाण्टिक महासागर

यह विश्व का दूसरा बड़ा महासागर है। इसकी औसत गहरा है लगभग ३००० मीटर है। यह उत्तर में बेफिन खाड़ी, हडसन खाड़ी, पूर्व में उत्तरी सागर से दक्षिण में अन्टार्कटिकर महाद्वीप तक फैला हुआ है।

(3) हिन्द महासागर

इसकी औसत गहराई 3600 मीटर है। उत्तर में इसका विस्तार कम लेकिन दक्षिण में अधिक है। दक्षिणी एशिया, पूर्वी अफ्रीका व पश्चिमी आस्ट्रेलिया द्वारा घिरा हुआ, यह महासागर दक्षिण में अन्टार्कटिका महाद्वीप तक फैला हुआ है।

(4) आर्कटिक महासागर

यह उत्तरी ध्रुव के चारों ओर फैला है। इसकी औसत गहराई 1800 मीटर है। यह वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढंका रहता है।
1. पृथ्वी के 71 प्रतिशत भाग पर जल और 29 प्रतिशत भाग पर थल है।
2. उत्तरी गोलार्द्ध में जल भाग कम और दक्षिणी गोलार्द्ध में जल भाग अधिक है।
3. संसार का सबसे बड़ा महासागर प्रशान्त महासागर है।

महासागरों की तली

स्थलमण्डल के समान ही जलमण्डल में ऊँचे-नीचे भाग स्थित है। महासागरीय तली, महाद्वीपीय किनारे से लेकर अत्यधिक गहराई तक भिन्न-भिन्न होती है। जिस प्रकार महाद्वीपों के धरातल पर पर्वत, पठार, मैदान आि पाये जाते हैं, उसी प्रकार महासागरों की तली भी ऊँची-नीची होती है। समुद्र कहीं कम गहरा, तो कहीं अधिक गहरा है। समुद्र तली को बनावट के आधार पर चार भागों में बाँटा जा सकता है।

(अ) महाद्वीपीय निमग्न तट

महाद्वीपों के चारों ओर तट के पास की भूमि, जो जल में डूबी होती है, उसे "महाद्वीपीय निमग्न तट" कहते हैं। ये तट मछलियों के भण्डार माने जाते हैं।

(ब) महाद्वीपीय निमग्न ढाल

महाद्वीपीय निमग्नतट की समाप्ति के बाद महाद्वीपीय निमग्न ढाल प्रारंभ हो जाता है। इसकी गहराई निमग्न तट से अधिक है।

(स) महासागरीय गहरे मैदान

महाद्वीपीय निमग्न ढाल के बाद गहरे मैदान प्रारंभ होते हैं। ये मैदान समुद्र की तली का सबसे अधिक भाग घेरे हुए है। इनमें समुद्र जीव - जन्तु के अवशेष एवं सूक्ष्म वनस्पति के अंश पाये जाते है।

(द) महासागरीय गर्त

समुद्र की तली में कहीं-कहीं गहरे होते हैं, जिन्हें महासागरीय गर्त कहते है। संसार का सबसे बड़ा गतं मैरियाना प्रशान्त महासागर में है।
1. महाद्वीपीय निमग्न तट मछलियों के भण्डार माने जाते हैं।
2. महासागरीय मैदान समुद्र की तली का अधिक भाग घेरे हुए है।
3. संसार का सबसे बड़ा गर्त मैरियाना है।

महासागरों से लाभ

महासागरों से निम्नलिखित लाभ है।

(अ) भूमि पर वर्षा

धरातल पर होने वाली समस्त वर्षा समुद्र से उठी भाप से होती है, जो वनस्पति, जीवजन्तु एवं मानव जीवन के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

(ब) तापमान का सन्तुलन

धरातल पर तापमान का सन्तुलन बनाए रखने में महासागर बहुत उपयोगी होते हैं।

(स) आवागमन के साधन

संसार के विभिन्न महाद्वीपों को जोड़ने वाले महासागरों से अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार संभव हुआ है।
उपरोक्त के अतिरिक्त महासागर खनिजों के भण्डार, सुरक्षा के उत्तम साधन, मछलियों के भण्डार एवं प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण माने गए हैं।

जल चक्र एवं इसका जीवन में महत्व

पृथ्वी के धरातल पर नदियाँ, झीलें, भूमिगत जल, तालाब, बर्फीले क्षेत्र, सागर एवं महासागर आदि जल के स्त्रोत हैं। इन जल स्त्रोतों से गर्मी में वाष्पीकरण अधिक होता है। जलवाष्प ऊपर उठकर ठण्डी हो। जाती है, जिससे बादल बनते है। इन बादलों से जल बूंदों के रूप में वर्षा होती है। वर्षा जल का कुछ अंश भूमि में समा जाता है तथा शेष नदी, नाले द्वारा महासागरों में पहुँच जाता है। इस प्रकार जल तीनों मण्डलों में अर्थात जलमण्डल से वायुमण्डल, वायुमण्डल से थलमण्डल और थलमण्डल से जलमण्डल में लगातार आता-जाता रहता है। पृथ्वी के तीन मण्डलों में जल के आवागमन को "जलचक्र" कहते हैं।

जल का दैनिक जीवन में महत्व

आदिकाल से जल का महत्व सभी जानते हैं। मानव एवं जीवधारियों को पीने, नहाने में, धोने में इसका उपयोग अधिक है। आजकल इससे जल विद्युत तैयार की जाती है। खेती में सिलाई के लिए तथा कल-कारखानो को चलाने में जल का उपयोग होता है।

I hope the above information will be useful and important.
(आशा है, उपरोक्त जानकारी उपयोगी एवं महत्वपूर्ण होगी।)
Thank you.
R F Temre
pragyaab.com

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